पंडित जवाहर लाल नेहरू आत्मकथा – Pandit Jawaharlal Nehru’s autobiography in Hindi

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पंडित जवाहरलाल नेहरु का जन्म एक अमीर घराने में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर प्राप्त की. वह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए. वहाँ से लौटकर वह बैरिस्टर हो गए लेकिन उन्होंने वकालत नहीं की.
उनमें देश-भक्ति कूट-कूट कर भरी थी. वह महात्मा गाँधी के संपर्क में आये. उनके जीवन में एक महान परिवर्तन हुआ. वह स्वतंत्रता-संग्राम में कूद पड़े. उन्हें अनेक यातनाएं सहनी पड़ी. कई बार उनको जेल भेजा गया. सन 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली. नेहरूजी को प्रथम प्रधानमन्त्री चुना गया. उन्होंने देश की गरीबी को दूर करने का प्रयत्न किया. वह भारत में समाजवाद का स्वप्न देखते थे. वे अपना सारा समय देश की समस्याओं को सुलझाने में व्यतीत करते थे. अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए सभी राष्ट्र उनकी ओर देखते थे.
मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं. उनकी अकेली संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 1917 में हुआ. बाद में वह भारत की प्रधानमंत्री बनीं. जवाहर लाल नेहरू ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए. कुछ महीनों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. आजादी की लड़ाई के 24 वर्ष में जवाहरलाल नेहरु जी को आठ बार बंदी बनाया गया, जिनमें से अंतिम और सबसे लंबा बंदीकाल, लगभग तीन वर्ष का कारावास जून 1945 में समाप्त हुआ. नेहरू ने कुल मिलाकर नौ वर्ष से ज़्यादा समय जेलों में बिताया. अपने स्वभाव के अनुरूप ही उन्होंने अपनी जेल-यात्राओं को असामान्य राजनीतिक गतिविधि वाले जीवन के अंतरालों के रूप में वर्णित किया है. नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए 1936, 1937 और 1946 में चुने गए थे. उन्हें 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी किया गया और 1945 में छोड दिया गया. 1947 में भारत और पाकिस्तान की आजादी के समय उन्होंने अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में महत्वपूर्ण भागीदारी की. सन् १९४७ में भारत को आजादी मिलने पर जब भावी प्रधानमंत्री के लिये कांग्रेस में मतदान हुआ तो तो सरदार पटेल को सर्वाधिक मत मिले. उसके बाद सर्वाधिक मत आचार्य कृपलानी को मिले थे. किन्तु गांधीजी के कहने पर सरदार पटेल और आचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया.
अंग्रेजों ने करीब 500 देशी रियासतों को एक साथ स्वतंत्र किया था और उस वक्त सबसे बडी चुनौती थी उन्हें एक झंडे के नीचे लाना. उन्होंने भारत के पुनर्गठन के रास्ते में उभरी हर चुनौती का समझदारी पूर्वक सामना किया.
जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया और तीन लगातार पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया. उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ. नेहरू ने भारत की विदेश नीति के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई.
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